सैयद हैदर रजा
सैयद हैदर रजा का जन्म मध्य प्रदेश के ककैया नामक गांव में 1922 में हुआ था। वह कई वर्षों से पेरिस में रह रहे हैं। उन्होंने स्थाई रूप से फ्रांस की नागरिकता ग्रहण कर ली थी। रजा प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप के जन्मदाता ओं में से एक थे। प्रारंभ में रजा की कला को देखकर उनके वाह्य अलंकरण उपादानो के प्रति मोह का पता चलता है। लेकिन जैसे-जैसे उनकी कला प्रौढ़ होती गई उनका यह मोह छूटता गया। रजा के रंग अंकन न भारतीय हैं ना ही ही ही फ्रांसीसी वे ऐसे रंग रंग हैं जिनके पास परंपरा की पूरी अर्थमय की छटा देखने को मिलती है।
सैयद हैदर रज़ा का जन्म मध्य प्रदेश के मंडला जिले में, जिले के उप वन अधिकारी सैयद मोहम्मद रज़ी और ताहिरा बेगम के घर हुआ था। तथा यही वह जगह थी जहां उन्होनें अपने जीवन के प्रारंभिक वर्ष गुज़ारे व 12 वर्ष की आयु में चित्रकला सीखी, जिसके बाद 13 वर्ष की आयु में मध्यप्रदेश के ही दमोह चले गए, जहां उन्होनें राजकीय उच्च विद्यालय, दमोह से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की।
हाई स्कूल के बाद, उन्होनें नागपुर में नागपुर कला विद्यालय (1939-43), तथा उसके बाद सर जे.जे. कला विद्यालय, बम्बई (1943-47) से अपनी आगे की शिक्षा ग्रहण की। जिसके बाद 1950-1953 की बीच फ़्रांस सरकार से छात्रवृति प्राप्त करने के बाद अक्टूबर 1950 में पेरिस के इकोल नेशनल सुपेरियर डे ब्यू आर्ट्स से शिक्षा ग्रहण करने के लिए फ़्रांस चले गए। पढ़ाई के बाद उन्होनें यूरोप भर में यात्रा की और पेरिस में रहे तथा अपने काम का प्रदर्शन जारी रखा। बाद में 1956 के दौरान उन्हें पेरिस में प्रिक्स डे ला क्रिटिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसे प्राप्त करने वाले वह पहले गैर-फ़्रांसिसी कलाकार बने।
उन्होनें भारतीय युवाओं को कला में प्रोत्साहन देने के लिए भारत में रज़ा की फाउंडेशन स्थापना भी की है जो युवा कलाकारों को वार्षिक रज़ा फाउंडेशन पुरस्कार प्रदान करता है।

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