फ्रांसिस न्यूटन सूजा
जन्म
12 अप्रैल 1924
गोवा
मृत्यु
28 मार्च 2002 (आयु 77 वर्ष)
मुंबई
राष्ट्रीयता
भारतीय
के लिए जाना जाता है
चित्रकला रेखाचित्र
उल्लेखनीय कार्य
"शब्द और रेखाएं"
आंदोलन
प्रगतिशील कला
साथी
श्रीमति लाल
सुजा का जन्म 1924 में गोवा में हुआ था प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप के जनक सूजा हुसैन रजा व आरा के साथ भारतीय आधुनिक कला जगत में चमके। इस ग्रुप में जोश व हिम्मत दोनों थी सूजा ने अनगिनत चित्र बनाये। सूजा का दिमाग कम्प्यूटर की तरह चलता था सूजा एक दिन मव कई चित्र बनाते थे । सूजा के अधिकांश काम एक्रेलिक से बने हैं। प्रभावशाली रेखांकन में समूची दुनिया ही समायी है। मसीह, सलीब, औरत, देवी -देवता, चेहरे आदि सभी कुछ सूजा रेखांकित करते हैं।
1947 में वे बॉम्बे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप के एक संस्थापक सदस्य थे, जिसने भारतीय कलाकारों को अंतर्राष्ट्रीय आर्ट इवेंट्स में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
1948 में लंदन के बर्लिंगटन हाउस में एक प्रदर्शनी में सूजा के चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया। 1949 में सूजा लंदन चले गए, जहां शुरुआत में एक कलाकार के रूप में एक प्रभाव बनाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने एक पत्रकार के रूप में काम किया। समकालीन कला संस्थान ने 1954 की प्रदर्शनी में उनके काम को शामिल किया। एक कलाकार के रूप में उनकी सफलता को स्टीफन स्पेंडर की एनकाउंटर पत्रिका में उनके आत्मकथात्मक निबंध (निर्वाण ऑफ द मैगॉट)1955 में प्रकाशित किया। स्पेंडर ने सूजा को गैलरी के मालिक कला डीलर विक्टर मुसाग्रेव से मिलवाया। सूजा को 1955 में हुई प्रदर्शनी में पेंटिंग्स बिकने में जिससे सफलता मिली ।
1959 में सूजा ने शब्द और रेखाएँ प्रकाशित कीं।
सूजा का कैरियर लगातार विकसित हुआ, और उन्होंने जॉन बर्जर से सकारात्मक समीक्षा प्राप्त करते हुए कई शो में भाग लिया। सुज़ा ने अभिव्यक्तिवादी, लेकिन रोमांटिकतावाद के तत्वों पर भी ड्राइंग करते थे।इतिहासकार यशोधरा डालमिया के अनुसार सुज़ा का काम अक्सर अत्यधिक कामुक होता था। उनकी ड्रॉइंग्स बोल्ड थीं।
जन्म
12 अप्रैल 1924
गोवा
मृत्यु
28 मार्च 2002 (आयु 77 वर्ष)
मुंबई
राष्ट्रीयता
भारतीय
के लिए जाना जाता है
चित्रकला रेखाचित्र
उल्लेखनीय कार्य
"शब्द और रेखाएं"
आंदोलन
प्रगतिशील कला
साथी
श्रीमति लाल
सुजा का जन्म 1924 में गोवा में हुआ था प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप के जनक सूजा हुसैन रजा व आरा के साथ भारतीय आधुनिक कला जगत में चमके। इस ग्रुप में जोश व हिम्मत दोनों थी सूजा ने अनगिनत चित्र बनाये। सूजा का दिमाग कम्प्यूटर की तरह चलता था सूजा एक दिन मव कई चित्र बनाते थे । सूजा के अधिकांश काम एक्रेलिक से बने हैं। प्रभावशाली रेखांकन में समूची दुनिया ही समायी है। मसीह, सलीब, औरत, देवी -देवता, चेहरे आदि सभी कुछ सूजा रेखांकित करते हैं।
1947 में वे बॉम्बे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप के एक संस्थापक सदस्य थे, जिसने भारतीय कलाकारों को अंतर्राष्ट्रीय आर्ट इवेंट्स में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
1948 में लंदन के बर्लिंगटन हाउस में एक प्रदर्शनी में सूजा के चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया। 1949 में सूजा लंदन चले गए, जहां शुरुआत में एक कलाकार के रूप में एक प्रभाव बनाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने एक पत्रकार के रूप में काम किया। समकालीन कला संस्थान ने 1954 की प्रदर्शनी में उनके काम को शामिल किया। एक कलाकार के रूप में उनकी सफलता को स्टीफन स्पेंडर की एनकाउंटर पत्रिका में उनके आत्मकथात्मक निबंध (निर्वाण ऑफ द मैगॉट)1955 में प्रकाशित किया। स्पेंडर ने सूजा को गैलरी के मालिक कला डीलर विक्टर मुसाग्रेव से मिलवाया। सूजा को 1955 में हुई प्रदर्शनी में पेंटिंग्स बिकने में जिससे सफलता मिली ।
1959 में सूजा ने शब्द और रेखाएँ प्रकाशित कीं।
सूजा का कैरियर लगातार विकसित हुआ, और उन्होंने जॉन बर्जर से सकारात्मक समीक्षा प्राप्त करते हुए कई शो में भाग लिया। सुज़ा ने अभिव्यक्तिवादी, लेकिन रोमांटिकतावाद के तत्वों पर भी ड्राइंग करते थे।इतिहासकार यशोधरा डालमिया के अनुसार सुज़ा का काम अक्सर अत्यधिक कामुक होता था। उनकी ड्रॉइंग्स बोल्ड थीं।

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