Tuesday, May 5, 2020

के के हैब्बर


 के के हैबर

जन्म
कटिंगरी कृष्णा हेब्बार
15 जून 1911
उडुपी, कर्नाटक, भारत

मृत्य
26 मार्च 1996

राष्ट्रीयता
भारतीय

शिक्षा
एकडेमी जूलियन
जे जे स्कूल ऑफ आर्ट

पुरस्कार
पद्म भूषण
पद्म श्री

ललित कला अकादमी की फैलोशिप

कटिंगेरी कृष्ण हेब्बर का जन्म 1912में दक्षिण कन्नड़ उडुपी, में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। हब्बर का झुकाव बचपन से ही कला की ओर था, क्योंकि उनके पिता एक सामयिक मूर्तिकार थे, जो गणेश की मूर्तियाँ बनाते थे। 1940-1945 के बीच मुंबई में जे जे स्कूल ऑफ आर्ट (सर जमशेदजी जीजेभॉय स्कूल ऑफ आर्ट) में एक कलात्मक पारिवारिक पृष्ठभूमि से आए हब्बर ने कला और औपचारिक रूप से अध्ययन किया। बाद में उन्होंने पेरिस के एकडेमी जूलियन में कला का अध्ययन किया। वह 1975-1993 के बीच बर्लिन के कला अकादमी से संबंधित सदस्य थ
मुगल व राजपूत कला से प्रभावित होकर उनके चित्रों में भारतीय परंपरागत शैली का लयबद्ध रेखांकन यथार्थवाद  व पाश्चात्य आधुनिक अंकन पद्धतियों का समन्वय रूप है उनके चित्रों में प्राय ग्रामीण जीवन के साथ साथ निर्धन श्रमिकों तथा साधारण लोगों के कार्यकलापों का वर्णन अंकित हुआ है इनके प्रसिद्ध चित्र में मुर्गे की लड़ाई ब्रिज  श्रीनगर तथा टाइल फैक्ट्री आदि उल्लेखनीय हैं।

हेब्बार की प्रारंभिक कलाकृतियों को मालाबार और तमिल नाडु के क्षेत्रों के परिदृश्य के चित्रण के कारण उनका केरल चरण कहा जाता था। बाद में उन्होंने अन्य विषयों के साथ प्रयोग किया। हेब्बार ने असंख्य इतिहासकारों से प्रेरणा ली जिसमें कला इतिहासकार आनंद कुमारस्वामी, जैन पांडुलिपियां, राजपूत और मुगल लघुचित्र, अजंता की गुफाओं में चित्रकारी, और अमृता शेरगिल की कलाएं शामिल हैं। उन्होंने पेरिस में एकेडमी जूलियन में भी अध्ययन किया, जहां उन्होंने यूरोपीय आधुनिकतावाद के लिए अपनी शैली विकसित की। उन्होंने पहली बार 1965  में आर्ट नाउ इन इंडिया प्रदर्शनियों में अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के मन को जीता जो लंदन और ब्रुसेल्स में आयोजित किए गए थे। हेब्बार ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों में भाग लिया जैसे कि वेनिस बिएनले, साओ पाउलो आर्ट बिएनियल और टोक्यो बिएनेल। आज, उनकी कलाकृतियाँ भारतीय कला इतिहास में अत्यधिक प्रभावशाली मानी जाती हैं।

पुरस्कार व सम्मान

हेब्बार ने अपने पूरे जीवनकाल में भारत के चौथे और तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री और पद्म भूषण सहित कई पुरस्कार जीते। उनके अन्य पुरस्कारों में एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स, कोलकाता, बॉम्बे आर्ट सोसाइटी अवार्ड, बॉम्बे स्टेट अवार्ड, ललित कला अकादमी पुरस्कार, वर्ना शिल्पी के वेंकटप्पा अवार्ड, मैसूर विश्वविद्यालय का मानद डॉक्टरेट, सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड शामिल हैं।

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