Friday, May 22, 2020

तैयब मेहता



पूरा नाम -तैयब मेहता 

जन्म - 26 जुलाई 1925 

जन्म भूमि-  गुजरात, ज़िला खेडा

मृत्यु - 2 जुलाई 2009

पत्नी - सकीना

संतान - पुत्र युसूफ और पुत्री हिमानी

कर्म भूमि -  भारत

कर्म-क्षेत्र - चित्रकला

पुरस्कार/उपाधि - पद्म भूषण

नागरिकता - भारतीय

अन्य जानकारी - सन 2002 में क्रिस्टी की नीलामी में जब उनकी एक पेंटिंग ‘सेलिब्रेशन’ लगभग 1.5 करोड़ रुपये में बिकी तब उस समय किसी भी भारतीय चित्रकार की यह सबसे महंगी पेंटिंग थी।

तैयब मेहता एक जाने-माने भारतीय चित्रकार थे। वे प्रसिद्ध ‘बॉम्बे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप’ के सदस्य थे। इस समूह में एफ.एन. सौज़ा, एस एच रज़ा और एम एफ हुसैन जैसे महान कलाकार भी शामिल थे। वे स्वतंत्रता के बाद की पीढ़ी के उन चित्रकारों में से थे जो राष्ट्रवादी बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट के परंपरा से हटकर एक आधुनिक विधा में कार्य करना चाहते थे। उनके जीवन के अंतिम दशक में उनकी बनायीं हुई पेंटिंग्स रिकॉर्ड कीमतों पर बिकीं जिसमें उनके मृत्यु के बाद बिकी एक पेंटिंग भी शामिल है जो दिसंबर 2014 में 17 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत पर बेची गयी। इससे पहले भी मेहता की एक पेंटिंग ‘गर्ल इन लव’ लगभग 4.5 करोड़ रुपये में बिकी थी। सन 2002 में उनकी एक पेंटिंग ‘सेलिब्रेशन’ लगभग 1.5 करोड़ रुपये में बिकी थी जो अन्तराष्ट्रीय स्तर पर उस समय तक की सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग थी।

आज भारतीय कला में सारी दुनिया की दिलचस्पी है और इस दिलचस्पी का एक बड़ा श्रेय तैयब मेहता को भी जाता है। जब क्रिस्टी जैसी कलादीर्घा ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी कृतियों की नीलामी की तो भारतीय कला के लिए ये एक बड़ी बात थी। समकालीन भारतीय कला इतिहास में तैयब मेहता ही अकेले पेंटर थे जिनका काम इतने कीमतों में बिका।

जीवन परिचय
तैयब मेहता का जन्म  गुजरात  के खेड़ा जिले में हुआ था। उनका पालन-पोषण मुम्बई के क्रावफोर्ड मार्केट में दावूदी बोहरा समुदाय में हुआ था। सन 1947 में उन्होंने विभाजन के बाद हुए दंगों में मुम्बई के मोहम्मद अली रोड पर एक व्यक्ति को पत्थर से मारे जाने की हृदय विदारक घटना देखी थी। इस घटना ने उनको इतना प्रभावित किया कि उनके कामों में इसकी झलक कहीं न कहीं हमें दिख ही जाती है।

तैयब मेहता ने प्रारंभ में कुछ समय के लिए मुंबई स्थित एक नामी फिल्म स्टूडियो ‘फेमस स्टूडियोज’ के लैब में फिल्म एडिटर का कार्य किया। बाद में उन्होंने मुम्बई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट्स में दाखिला लिया और सन 1952 में यहाँ से डिप्लोमा ग्रहण किया। इसके बाद वे ‘बॉम्बे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप’ के सदस्य बन गए। यह ग्रुप पश्चिम के आधुनिकतावादी शैली से प्रभावित था और तैयब के साथ-साथ उसमें एफ.एन. सौज़ा, एस एच रज़ा और एम एफ हुसैन जैसे महान कलाकार भी शामिल थे।

No comments:

Post a Comment

कृपया आप अपने सुझाव अवश्य दें। आपके विचार और आपका ज्ञानवर्धक कॉमेंट हमे तथा हमारे पाठको के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। धन्यवाद!