Friday, May 22, 2020

हेमा उपाध्याय



हेमा उपाध्याय एक भारतीय कलाकार थीं. उनका जन्म 1972 में बड़ौदा, भारत में हुआ था. 1998 के बाद से मुम्बई शहर में रहीं. 11 दिसंबर 2015 में उनकी और उनके वकील की हत्या कर दी गई. 

हेमा उपाध्याय 

जन्म - Hema Hirani, changed her name to Hema Upadhyay in 1998. 

18 मई 1972 

बड़ौदा, भारत 

मृत्यु - 11 दिसंबर 2015 (43 साल) 

मुंबई, भारत 

राष्ट्रीयता - भारतीय 

शिक्षा - Completed her Bachelor's (Painting) and Master's (Printmaking) in Fine Arts from M.S. College, Baroda in 1995 and 1997 individually. 

उपाध्याय विस्थापन तथा विरह के भावों को चित्रित करने के लिए फोटोग्राफी और कलाकृतियों की स्थापना का इस्तेमाल करती थीं. 

शुरूआती कार्य 

खट्टी-मीठी यादें 

हेमा की स्वीट स्वेट मेमोरीज (खट्टी-मीठी यादें) नामक पहली एकल प्रदर्शनी का आयोजन 2001 में चेमोल्ड (जिसे अब चेमोल्ड प्रेस्कॉट रोड, मुंबई के नाम से जाना जाता है) में किया गया था. इस प्रदर्शनी में कागज पर किये गए विविध प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया था. इन कार्यों में उन्होंने 1998 में मुंबई आने के बाद के अपने प्रवास संबंधी विचारों को पेश करने के लिए स्वयं की तस्वीरों को शामिल किया था. आत्म-चित्रण के एक लघु फोटोग्राफिक संग्रह का शामिल किया जाना हेमा के चित्रों की एक सामान्य विशेषता है. विभिन्न मुद्राओं में अपनी छवियों को छोटा करके वे उन्हें अपने रूपात्मक परिदृश्यों में समावेशित कर अपने द्वारा रचित आलंकारिक तथा काल्पनिक वातावरण के साथ मिश्रित होने का मौका प्रदान करती हैं. 

खट्टी-मीठी यादें, एक नए स्थान पर जाने के बाद स्वाभाविक तौर पर उत्पन्न होने वाली अलगाव तथा नुकसान की भावना के साथ-साथ आश्चर्य और उत्साह की भावना को भी सुंदर तरीके से चित्रित करती है. कागज पर किये गए विविध प्रकार के कार्यों की यह प्रदर्शनी उनके एक पड़ोसी की आत्महत्या तथा उनके द्वारा एक ऐसे शहरी क्षेत्र में रहने के कारण उत्पन्न होने वाले भ्रम से प्रेरित थी, जहां स्वप्नों तथा आकांक्षाओं हवा देने के साथ-साथ बड़ी बेरहमी से कुचल भी दिया जाता है. इस प्रदर्शनी का प्रमुख चित्र इन भावनाओं को बेहद सुंदर तरीके से चित्रित करता है. यह एक चौड़े और मुस्कराते हुए मुख का एक करीबी चित्र (क्लोज अप) है जो सर्वव्यापी सड़न तथा पतन को दर्शाता है. 

अन्य कार्य 

2001 में हेमा की प्रथम एकल अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी आर्टस्पेस, सिडनी तथा इंस्टीट्यूट ऑफ मॉडर्न आर्ट, ब्रिस्बेन, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित की गयी जिसमे उन्होंने दी निम्फ एंड दी एडल्ट (इसे नई दिल्ली में आयोजित होने वाले दसवें इंटरनेशनल ट्राईएनियल - इंडिया में भी प्रदर्शित किया गया था) नामक एक कलाकृति को प्रदर्शित किया; उन्होंने एकदम जीवंत लगने वाले 2000 कॉकरोच (तिलचट्टे) को हाथ से बनाया और अपने दर्शकों की घृणा तथा आकर्षण प्राप्त करने के लिए उन्हें पूरी गैलरी में छोड़ दिया. इस कार्य की मंशा दर्शकों को सैन्य गतिविधियों के परिणामों के बारे में सोचने हेतु प्रेरित करना था. 

द निम्फ और द अडल्ट, इन्सटॉलेशन, 2001, आर्टस्पेस, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया 

2003 में उन्होंने मेड इन चाइना नामक एक सहयोगात्मक कार्य किया जिसमे बड़े पैमाने पर उवभोक्तावद , वैश्वीकरण तथा इनके कारण लुप्त होती पहचान के बारे में बताया गया था. उनका अगला सहयोगात्मक कार्य 2006 में अपनी मां बीना हीरानी के साथ मिलकर किया गया था; इस कार्य का शीर्षक था मम-माई (mum-my) और इसे शिकागो सांस्कृतिक केन्द्र में प्रदर्शित किया गया.

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